Bihar Mukhyamantri Mahila Rojgar Yojana को लेकर बड़ी खबर आई है। इस योजना के तहत बिहार की 8,053 ग्राम पंचायतों में जीविका सुधा बिक्री केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। एक बिक्री केंद्र पर कुल 75 हजार रुपये का निवेश होगा, जिसमें सरकार की ओर से 60 हजार रुपये की सहायता मिलेगी और महिला लाभार्थी को 15 हजार रुपये का अंशदान करना होगा। इन केंद्रों के जरिए ग्रामीण महिलाएं अपने घर के पास ही स्वरोजगार शुरू कर परिवार की आय बढ़ा सकेंगी।
बिहार कैबिनेट ने 29 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को मंजूरी दी थी। इसका मकसद हर परिवार की एक महिला को अपना छोटा काम शुरू करने के लिए पूंजी देना है — चाहे सिलाई हो, डेयरी हो या किराना दुकान। योजना ग्रामीण विकास विभाग के तहत बिहार ग्रामीण आजीविका प्रोत्साहन समिति (BRLPS / जीविका) के नेटवर्क से चलती है, यानी पूरी प्रक्रिया स्वयं सहायता समूह (SHG) के इर्द-गिर्द घूमती है।
सुधा बिक्री केंद्र: नई पहल से खुलेंगे रोजगार के रास्ते
योजना के तहत चल रही ‘सुधा सखी’ पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खोल रही है। जहानाबाद जिले की हीरामणि देवी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं — गंगा जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य हीरामणि ने समूह में महज 10 रुपये जमा करके बचत शुरू की थी, और आज जीविका के माध्यम से उन्हें सुधा दूध की दुकान मिली है। किशनगंज की रेशमा कुमारी ने ऑनलाइन आवेदन किया और लॉटरी से उनका चयन हुआ। घर के नजदीक रोजगार मिलने से महिलाओं को घरेलू जिम्मेदारियों और काम के बीच संतुलन बनाने में सहूलियत मिलती है।
जहानाबाद में 88 में से 83 पंचायतों में केंद्र संचालित
जहानाबाद जिले में तेजी से काम चल रहा है। जीविका के जिला परियोजना प्रबंधक विनय कुमार सिंह के अनुसार, सुधा (कॉम्फेड) के सहयोग से जीविका दीदियों को बिक्री केंद्र खोलने का अवसर दिया जा रहा है। जिले की कुल 88 पंचायतों में से 83 पंचायतों में केंद्र के लिए दीदियों का चयन कर लिया गया है।
कितनी मिलेगी सहायता? जानिए राशि का पूरा गणित
- सुधा बिक्री केंद्र: कुल 75,000 रुपये का निवेश — सरकार से 60,000 रुपये की सहायता, महिला लाभार्थी का 15,000 रुपये का अंशदान।
- योजना की पहली सहायता: जीविका समूह से जुड़ी पात्र महिलाओं को पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए 75 लाख महिलाओं के खातों में यह राशि ट्रांसफर की थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार फरवरी 2026 तक करीब 1 करोड़ 81 लाख महिलाओं को पहली सहायता भेजी जा चुकी थी।
- कुल सहायता: व्यवसाय ठीक चलने पर आगे पांच चरणों में कुल 2.10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है।
- भुगतान का तरीका: राशि DBT (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) से सीधे बैंक खाते में आती है।
कौन ले सकता है लाभ? पात्रता की शर्तें
- महिला का जीविका स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य होना अनिवार्य है।
- संबंधित पंचायत क्षेत्र में केंद्र चलाने के लिए स्वयं की या किराये की दुकान उपलब्ध होनी चाहिए।
- चयन ऑनलाइन आवेदन के बाद लॉटरी से भी हो सकता है।
- बिहार के हर परिवार की एक महिला योजना के तहत पात्र मानी जाती है।
आवेदन की प्रक्रिया
- ग्रामीण महिलाएं अपने क्षेत्र के ग्राम संगठन / स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आवेदन करें।
- शहरी महिलाएं योजना के आधिकारिक पोर्टल mmry.brlps.in से आवेदन कर सकती हैं।
- सुधा बिक्री केंद्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध है, जिसके बाद चयन प्रक्रिया पूरी होती है।
- बैंक खाते का आधार से लिंक होना और DBT सक्रिय होना जरूरी है।
- आवेदन की समय-सीमा, चयन की शर्तों और दस्तावेजों की जानकारी संबंधित जीविका कार्यालय से जरूर प्राप्त करें।
किन सुविधाओं पर खर्च होगी सहायता राशि?
बिक्री केंद्र के लिए मिलने वाली राशि का इस्तेमाल जरूरी सुविधाओं में होता है — डीप फ्रीजर और विजी कूलर, दुकान की ब्रांडिंग और पेंटिंग, उत्पादों के भंडारण और बिक्री की व्यवस्था और परिवहन से जुड़ी आवश्यकताएं। सरकारी सहायता से शुरुआती आर्थिक बोझ कम होता है और महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलती है।
दूसरी किस्त को लेकर क्या जानकारी है?
कई महिलाओं के मन में सवाल है कि पहली किस्त के 10,000 रुपये के बाद दूसरी किस्त कब आएगी। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, जून 2026 में मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से 2.10 लाख रुपये तक की सहायता और दूसरी किस्त जल्द देने की बात कही गई थी। हालांकि, सभी लाभार्थियों के लिए एक समान दूसरी किस्त की तारीख अभी तक सरकारी तौर पर घोषित नहीं हुई है। इसलिए सोशल मीडिया पर बताई जा रही किसी भी तारीख पर भरोसा करने के बजाय, लाभार्थी अपना आधिकारिक भुगतान स्टेटस और बैंक खाता नियमित रूप से जांचते रहें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना में कितनी राशि मिलती है?
उत्तर: पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये दिए जाते हैं। व्यवसाय ठीक चलने पर आगे पांच चरणों में कुल 2.10 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। सुधा बिक्री केंद्र के लिए 75,000 रुपये के निवेश में 60,000 रुपये सरकारी सहायता मिलती है।
प्रश्न 2: सुधा बिक्री केंद्र खोलने के लिए कौन पात्र है?
उत्तर: महिला का जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य होना अनिवार्य है। इसके अलावा संबंधित पंचायत क्षेत्र में स्वयं की या किराये की दुकान होनी चाहिए। चयन ऑनलाइन आवेदन के बाद लॉटरी से भी हो सकता है।
प्रश्न 3: आवेदन कहां और कैसे करें?
उत्तर: ग्रामीण महिलाएं अपने ग्राम संगठन या स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आवेदन करें। शहरी महिलाएं पोर्टल mmry.brlps.in से आवेदन कर सकती हैं।
प्रश्न 4: राशि कब और कैसे खाते में आएगी?
उत्तर: राशि DBT के माध्यम से सीधे लाभार्थी के आधार से जुड़े बैंक खाते में आती है। इसलिए बैंक खाते का आधार से लिंक होना और DBT सुविधा सक्रिय होना जरूरी है।
प्रश्न 5: दूसरी किस्त की कोई तारीख घोषित हुई है?
उत्तर: अभी तक सभी लाभार्थियों के लिए एक समान दूसरी किस्त की तारीख घोषित नहीं हुई है।
स्रोत: Live Varta (17 अक्टूबर 2026), बिहार ग्रामीण विकास विभाग, BRLPS/जीविका। भुगतान की तारीखें और प्रक्रिया समय-समय पर बदल सकती हैं, इसलिए अंतिम पुष्टि आधिकारिक पोर्टल या अपने जीविका ग्राम संगठन से जरूर करें।












