PM Vishwakarma Yojana 2026 – हमारे गांव-कस्बों में ऐसे हुनरमंद हाथ आज भी मौजूद हैं जो लकड़ी में जान फूंक देते हैं, लोहे को मनचाहा आकार दे देते हैं और मिट्टी से बर्तन गढ़ लेते हैं। बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची और राजमिस्त्री जैसे ये कारीगर देश की असली पहचान हैं। पर सच यह भी है कि इनमें से कई के पास न नए औजार होते हैं, न सस्ता कर्ज, न अपना माल बेचने का बड़ा बाजार। केंद्र सरकार की पीएम विश्वकर्मा योजना इन्हीं दिक्कतों का हल निकालने के लिए बनी है। अगर आप या आपके परिवार में कोई ऐसा पारंपरिक काम करता है, तो आगे की जानकारी ध्यान से पढ़िए।
योजना आखिर है क्या?
यह केंद्र सरकार की योजना है, जो 17 सितंबर 2023 को विश्वकर्मा जयंती के मौके पर शुरू की गई थी। इसका मकसद पारंपरिक कारीगरों को पहचान देना, उन्हें हुनर निखारने का मौका देना, आधुनिक औजार दिलाना, बिना गारंटी सस्ता कर्ज उपलब्ध कराना और उनके सामान के लिए बाजार जोड़ना है। यानी पहचान, प्रशिक्षण, औजार, कर्ज और बाजार, पांचों चीजें एक ही योजना में।
सरकार ने 2023-24 से 2027-28 तक के लिए इस योजना का कुल बजट ₹13,000 करोड़ तय किया है, और यह 31 मार्च 2028 तक लागू रहेगी। इसके पीछे सोच यह है कि “वोकल फॉर लोकल” और आत्मनिर्भर भारत का सपना जमीन पर उतरे, क्योंकि सदियों पुराने हुनर औजारों, पूंजी और बाजार की कमी से धीरे-धीरे दम तोड़ रहे थे।
योजना से क्या-क्या मिलता है?
पात्र कारीगर को एक साथ कई फायदे मिलते हैं:
- प्रमाणपत्र और पहचान पत्र: पंजीकृत कारीगर को पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड मिलता है, जिससे उसे सरकार से मान्यता प्राप्त कारीगर की पहचान मिलती है।
- मुफ्त ट्रेनिंग: पांच से सात दिन की बुनियादी ट्रेनिंग दी जाती है। जो और आगे बढ़ना चाहें, उनके लिए एडवांस ट्रेनिंग का भी प्रावधान है।
- ट्रेनिंग भत्ता: ट्रेनिंग के हर दिन ₹500 का वजीफा मिलता है, ताकि काम छोड़कर सीखने आने पर दिहाड़ी का नुकसान न हो।
- ₹15,000 का टूलकिट: नए और बेहतर औजार खरीदने के लिए ₹15,000 का ई-वाउचर दिया जाता है।
- ₹3 लाख तक का लोन: बिना किसी गारंटी के, सिर्फ 5% सालाना ब्याज पर।
- डिजिटल प्रोत्साहन: हर डिजिटल लेनदेन पर ₹1 का कैशबैक मिलता है, महीने में अधिकतम 100 लेनदेन तक। साथ में डिजिटल मार्केटिंग की ट्रेनिंग भी दी जाती है।
- बाजार से जुड़ाव: कारीगरों के उत्पाद सरकारी ई-मार्केटप्लेस GeM और दूसरे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़े जाते हैं, ताकि माल पूरे देश में बिक सके।
कर्ज की पूरी कहानी: ₹1 लाख और फिर ₹2 लाख
योजना का सबसे बड़ा आकर्षण यही कर्ज है। यह दो किस्तों में मिलता है।
पहली किस्त, ₹1 लाख: बुनियादी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कारीगर इतना कर्ज ले सकता है। इसे काम शुरू करने या बढ़ाने में लगाया जा सकता है।
दूसरी किस्त, ₹2 लाख: पहली किस्त का समय पर भुगतान करने और कुछ शर्तें पूरी करने के बाद ₹2 लाख तक का दूसरा कर्ज मिलता है।
सबसे राहत की बात यह है कि आपको सिर्फ 5% ब्याज देना होता है। बैंक को बाजार दर के हिसाब से जो अतिरिक्त ब्याज बनता है, करीब 8%, उसे सरकार खुद सब्सिडी के रूप में चुकाती है। न कोई गारंटर चाहिए, न कोई संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है। पारंपरिक कारीगरों के लिए यह सचमुच बड़ी राहत है।
ट्रेनिंग, भत्ता और टूलकिट
ट्रेनिंग में कारीगर को अपने हुनर के आधुनिक तरीके सिखाए जाते हैं, जैसे नए डिजाइन, बेहतर औजारों का इस्तेमाल, क्वालिटी सुधारना और ग्राहक से बात करने का सलीका। ₹500 का रोजाना भत्ता इसलिए रखा गया है कि गरीब कारीगर ट्रेनिंग के बहाने कमाई से हाथ न धो बैठे। ट्रेनिंग पूरी होने पर ₹15,000 का ई-वाउचर मिलता है, जिससे आप अपने काम के नए औजार खरीद सकते हैं। पुराने घिसे औजारों से अच्छा काम नहीं निकलता, और नए टूल से कमाई और उत्पादकता, दोनों बढ़ती हैं।
कौन आवेदन कर सकता है?
- भारत का नागरिक हो और उम्र कम से कम 18 साल हो
- हाथ और औजारों से पारंपरिक काम करता हो और 18 तय व्यवसायों में से किसी एक से जुड़ा हो
- असंगठित क्षेत्र में स्वरोजगार कर रहा हो
- आवेदन के समय सक्रिय रूप से उसी काम में लगा हो
- सरकारी कर्मचारी या उनके परिवार के सदस्य न हों
- एक परिवार से सिर्फ एक सदस्य आवेदन करे। यहां परिवार का मतलब है पति, पत्नी और अविवाहित बच्चे
- पिछले 5 साल में PMEGP, PM SVANidhi या मुद्रा जैसी कर्ज वाली योजनाओं से लोन न लिया हो
कौन-से 18 व्यवसाय शामिल हैं?
बढ़ई, पारंपरिक नाव बनाने वाला, लोहार, ताला बनाने वाला, सुनार, कुम्हार, मूर्तिकार, पत्थर तराशने या तोड़ने वाला, मोची, राजमिस्त्री, टोकरी-चटाई-झाड़ू बनाने वाला या कॉयर बुनकर, पारंपरिक गुड़िया-खिलौने बनाने वाला, नाई, मालाकार, धोबी, दर्जी, हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाला, और मछली का जाल बनाने वाला। इनके साथ बुनकर जैसे कपड़े से जुड़े कारीगर भी योजना के दायरे में आते हैं। फिर भी अपने नजदीकी CSC केंद्र पर पूछकर पक्का कर लें कि आपका काम सूची में है या नहीं।
आवेदन कैसे करें?
एक बात पहले ही समझ लीजिए: इस योजना में घर बैठे सीधे ऑनलाइन आवेदन नहीं होता। प्रक्रिया ऐसे चलती है:
- CSC केंद्र जाएं: अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर, यानी जनसेवा केंद्र पर पहुंचें।
- कागज साथ रखें: आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी (खाता नंबर और IFSC) और काम से जुड़ा कोई प्रमाण या जानकारी साथ ले जाएं।
- पोर्टल पर पंजीकरण: CSC ऑपरेटर आपका पंजीकरण आधिकारिक पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर करेगा। उसी समय फिंगरप्रिंट से बायोमेट्रिक जांच भी होती है।
- तीन स्तर की जांच: आपके आवेदन की पड़ताल ग्राम पंचायत और दूसरे अधिकारियों के स्तर पर होती है। कुल तीन चरणों में सत्यापन होता है।
- प्रमाणपत्र और आईडी: जांच के बाद आपको पीएम विश्वकर्मा प्रमाणपत्र और आईडी कार्ड मिलता है।
- ट्रेनिंग और लाभ: फिर ट्रेनिंग का कार्यक्रम बनता है। ट्रेनिंग पूरी होते ही टूलकिट वाउचर और कर्ज की प्रक्रिया शुरू होती है।
आवेदन बिल्कुल मुफ्त है। अगर कोई CSC ऑपरेटर या एजेंट आवेदन के नाम पर पैसे मांगे, तो उसकी शिकायत कीजिए। योजना का आधिकारिक पोर्टल सिर्फ pmvishwakarma.gov.in है। किसी और वेबसाइट पर अपनी जानकारी मत डालिए।
कौन-से कागज चाहिए?
- आधार कार्ड, बायोमेट्रिक जांच के लिए जरूरी
- बैंक खाते का विवरण, क्योंकि पैसा सीधे खाते में आता है
- मोबाइल नंबर, बेहतर हो अगर आधार से जुड़ा हो
- काम का प्रमाण या स्व-घोषणा कि आप उसी व्यवसाय में लगे हैं
- पासपोर्ट साइज फोटो
आवेदन की स्थिति कैसे जानें?
आवेदन के बाद आप अपने CSC केंद्र से या पोर्टल pmvishwakarma.gov.in पर पंजीकरण नंबर डालकर स्थिति देख सकते हैं। जांच तीन चरणों में होती है, इसलिए थोड़ा वक्त लग सकता है। घबराइए मत। अगर जांच में कोई कमी बताई जाए, तो CSC केंद्र जाकर उसे ठीक करवा लीजिए।
इन बातों का खास ध्यान रखें
- परिवार से एक ही सदस्य को फायदा मिलेगा, इसलिए सोच-समझकर तय करें कि कौन आवेदन करे।
- पिछले 5 साल में PMEGP, PM SVANidhi या मुद्रा का लोन लिया हो, तो आप पात्र नहीं हैं।
- आवेदन में वही काम लिखवाइए जो आप सच में करते हैं। गलत जानकारी मिली तो जांच में आवेदन रद्द हो सकता है।
- योजना 31 मार्च 2028 तक खुली है, पर ट्रेनिंग और लोन चरणों में बांटे जाते हैं। जल्दी आवेदन करने वालों को पहले फायदा मिलता है।
कुछ आम सवाल
कितना कर्ज मिलता है? कुल ₹3 लाख तक, यानी पहली किस्त ₹1 लाख और दूसरी ₹2 लाख। ब्याज सिर्फ 5% और कोई गारंटी नहीं।
क्या घर बैठे ऑनलाइन आवेदन हो सकता है? नहीं। आवेदन CSC केंद्र पर बायोमेट्रिक जांच के साथ होता है और वहीं से पोर्टल पर पंजीकरण किया जाता है।
ट्रेनिंग कितने दिन की है और भत्ता कितना? बुनियादी ट्रेनिंग पांच से सात दिन की है और हर दिन के ₹500 मिलते हैं। चाहें तो एडवांस ट्रेनिंग भी ले सकते हैं।
टूलकिट कैसे मिलता है? ट्रेनिंग पूरी होने पर ₹15,000 का ई-वाउचर मिलता है, जिससे काम के औजार खरीद सकते हैं।
क्या महिलाएं भी आवेदन कर सकती हैं? बिल्कुल। अगर महिला कारीगर 18 व्यवसायों में से किसी से जुड़ी है और बाकी शर्तें पूरी करती है, तो वह भी आवेदन कर सकती है।
कर्ज न चुकाया तो? यह कर्ज बैंक के जरिए मिलता है, इसलिए समय पर किस्त भरना जरूरी है। दूसरी किस्त तभी मिलती है जब पहली का भुगतान ठीक से हुआ हो। समय पर चुकाने से आपकी क्रेडिट हिस्ट्री भी बनती है, जो आगे बड़े कर्ज में काम आती है।
पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों के लिए सचमुच सुनहरा मौका है। ₹3 लाख तक का सस्ता कर्ज, ₹15,000 का टूलकिट, ट्रेनिंग के साथ ₹500 रोज का भत्ता, डिजिटल कैशबैक और बाजार का सहारा, इतना सब एक ही जगह मिलना कम बात नहीं। सबसे अच्छी बात यह कि न गारंटी चाहिए और ब्याज भी सिर्फ 5%।
अगर आप बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, दर्जी, नाई, मोची, राजमिस्त्री या तय 18 व्यवसायों में से किसी हुनर से जुड़े हैं, तो देर मत कीजिए। अपने नजदीकी CSC केंद्र पर जाइए और आवेदन करवाइए। यह जानकारी अपने उन दोस्तों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों तक भी पहुंचाइए जो कारीगरी करते हैं, ताकि कोई भी हुनरमंद इस मदद से छूट न जाए।












