PM Kusum Yojana 2026 – हर किसान जानता है कि सिंचाई का खर्च कितना भारी पड़ता है। कहीं डीजल के दाम सताते हैं, तो कहीं बिजली के बिल और कटौती। पीएम कुसुम योजना इसी झंझट से छुटकारा दिलाने के लिए है। इसमें सूरज की रोशनी से पंप चलता है और लागत का बड़ा हिस्सा सरकार और बैंक उठा लेते हैं। आइए सीधी-सादी भाषा में समझें कि इसमें क्या-क्या मिलता है और फायदा कैसे लें।
योजना की शुरुआत और ताजा हाल
इसका पूरा नाम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इसे 2019 में चालू किया था, ताकि किसान सौर ऊर्जा का सहारा ले सकें। ताजा जानकारी के अनुसार काम पूरे करने की समय-सीमा अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी गई है। साथ ही 23 लाख से ज्यादा किसान अब तक इसका लाभ उठा चुके हैं। यानी भरोसा करने लायक योजना है, और अभी वक्त भी बाकी है।
तीन हिस्से, आप किसमें आते हैं?
step A: आपके पास बंजर या खाली जमीन है? तो वहां 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक का सोलर बिजलीघर लग सकता है। किसान, किसानों के समूह और सहकारी समितियां जुड़ सकती हैं। बिजली बिजली कंपनी को बेचिए और कमाई कीजिए।
step B: जिन खेतों तक बिजली की लाइन पहुंची ही नहीं, यह उनके लिए है। अब तक वहां महंगे डीजल पंप से काम चलता था। अब खेत में अलग से सोलर पंप लगेगा, जो धूप में चलेगा। डीजल का खर्च खत्म। पूरी योजना में यही हिस्सा सबसे ज्यादा लोकप्रिय है।
step C: अगर आपके पास पहले से बिजली वाला पंप है, तो उसी को सोलर से जुड़वा लीजिए। बिजली का बिल काफी कम हो जाएगा। खेत में जरूरत से ज्यादा बिजली बने तो उसे ग्रिड को बेचकर थोड़ी और कमाई भी हो सकती है।
पैसा कौन कितना देगा?
हिस्सा B और C में सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा कुछ ऐसा रहता है:
- केंद्र सरकार: 30%
- राज्य सरकार: 30%
- बैंक कर्ज: 30%
- किसान: सिर्फ 10%
यानी 60% तक सीधी सब्सिडी और बाकी में से ज्यादातर कर्ज। आपको कुल लागत का केवल दसवां हिस्सा देना है। पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में केंद्र की सब्सिडी 50% तक मिलती है। हिस्सा A में पूंजीगत सब्सिडी नहीं है, वहां कमाई बिजली बेचने के अनुबंध से होती है। सोलर पंप 7.5 HP तक का मिल सकता है। राज्य के हिसाब से प्रतिशत थोड़ा बदल सकता है, इसलिए पक्की जानकारी अपने राज्य की नोडल एजेंसी से ले लें।
आप पात्र हैं या नहीं?
- आप भारत के स्थायी नागरिक और पंजीकृत किसान हों
- खेत आपके नाम हो, या आप उसे वैध रूप से जोतते हों, जैसे लीज पर
- हिस्सा B के लिए खेत में बिजली कनेक्शन न हो, या इलाका ऑफ-ग्रिड हो
- हिस्सा C के लिए पहले से चालू हालत वाला ग्रिड से जुड़ा कृषि पंप हो
- हिस्सा A के लिए किसान, समूह, सहकारी समिति, पंचायत या FPO आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उपयुक्त जमीन हो
- आधार और बैंक खाता सही हों और आपस में जुड़े हों
कागज पहले से तैयार रखें
- आधार कार्ड
- जमीन के कागजात
- बैंक पासबुक की कॉपी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
- राशन कार्ड या निवास प्रमाण पत्र
- जमीन साझा हो तो बाकी हिस्सेदारों की सहमति (NOC)
- हिस्सा A के लिए जमीन का नक्शा और मालिकाना या लीज के कागज
घर बैठे आवेदन कैसे करें?
- अपने राज्य की नोडल एजेंसी का पोर्टल खोलें। योजना की जानकारी pmkusum.mnre.gov.in पर भी मिलेगी।
- अपना राज्य चुनें और “आवेदन करें” पर क्लिक करें।
- नया रजिस्ट्रेशन कीजिए। मोबाइल पर OTP आएगा, उसे डालकर नंबर पक्का करें।
- अपनी जरूरत के हिसाब से हिस्सा B या C चुनें। नाम, पता और जमीन का ब्योरा भरें और एक बार फिर मिला लें।
- कागज साफ स्कैन करके पोर्टल के बताए रूप में अपलोड करें।
- अगर राज्य में कोई शुल्क या अंशदान लगता है, तो उसे ऑनलाइन जमा कर दें। देर की तो आवेदन अटक सकता है।
- अंत में पूरा फॉर्म देखकर सबमिट करें। जो आवेदन संख्या मिले, उसका स्क्रीनशॉट रख लें।
दफ्तर जाकर भी हो सकता है
ऑनलाइन में दिक्कत हो तो नजदीकी कृषि विभाग, बिजली कंपनी के दफ्तर या राज्य की नोडल एजेंसी जाइए। फॉर्म लेकर साफ अक्षरों में भरिए, कागजों की फोटोकॉपी लगाइए और जमा करते वक्त रसीद लेना न भूलें। इसके बाद अधिकारी कागज जांचते हैं और खेत पर आकर निरीक्षण भी करते हैं। सब ठीक रहा तो आपको चयन की सूचना दे दी जाती है।
अर्जी का हाल कैसे जानें?
जिस राज्य पोर्टल से आवेदन किया था, उसी को खोलिए। “आवेदन की स्थिति” पर क्लिक कीजिए और आवेदन संख्या व मोबाइल नंबर डालिए। कैप्चा भरकर सबमिट करते ही स्थिति दिख जाएगी। दफ्तर में आवेदन किया हो, तो रसीद लेकर उसी दफ्तर में पूछ लीजिए।
हेल्पलाइन
कुछ समझ न आए तो राष्ट्रीय पोर्टल पर दिया गया टोल-फ्री नंबर 1800-180-3333 मिला सकते हैं।
सोलर पंप एक बार लगा तो सालों तक सिंचाई का खर्च हल्का रहेगा। इसलिए कागज तैयार रखिए, सही पोर्टल से अर्जी दीजिए और गांव के दूसरे किसानों को भी बताइए, ताकि कोई पीछे न रह जाए।












