solar pumps – खेत में सिंचाई के लिए डीजल का खर्च हर किसान की जेब पर भारी पड़ता है। बिजली का कनेक्शन न हो तो मुसीबत और बढ़ जाती है। इसी परेशानी का हल लेकर आई है पीएम कुसुम योजना। इसमें किसान सोलर पंप लगवाकर अपनी सिंचाई का खर्च लगभग खत्म कर सकते हैं, और वह भी सरकारी मदद के साथ। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि इसमें क्या मिलता है और आवेदन कैसे करना है।
योजना क्या है?
पीएम कुसुम का पूरा नाम प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान है। इसे नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने 2019 में शुरू किया था। मकसद है किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ना। ताजा जानकारी के मुताबिक प्रोजेक्ट पूरा करने की समय-सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है, और अब तक 23 लाख से ज्यादा किसान इसका फायदा ले चुके हैं।
योजना के तीन हिस्से
हिस्सा A: इसमें बंजर या खाली जमीन पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट तक का सोलर प्लांट लगता है। किसान, किसानों के समूह या सहकारी समितियां इसमें शामिल हो सकती हैं। बिजली बिजली कंपनी (डिस्कॉम) को बेचकर कमाई होती है।
हिस्सा B: यह उन खेतों के लिए है जहां बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। यहां खेत में अलग से सोलर पंप लगता है, जो धूप से चलता है, इसलिए डीजल की जरूरत खत्म। पूरी योजना में यही हिस्सा सबसे ज्यादा चलन में है।
हिस्सा C: जिनके पास पहले से बिजली वाला पंप है, उनके लिए। उसी पंप को सोलर से जोड़ दिया जाता है, जिससे बिजली का बिल काफी घट जाता है। अगर ज्यादा बिजली बने, तो उसे ग्रिड को बेचकर थोड़ी कमाई भी हो सकती है।
कितनी सब्सिडी मिलती है?
हिस्सा B और C में आम तौर पर खर्च का बंटवारा कुछ इस तरह रहता है:
- केंद्र सरकार की सब्सिडी: 30%
- राज्य सरकार की सब्सिडी: 30%
- बैंक लोन: 30%
- किसान का अपना हिस्सा: सिर्फ 10%
यानी पंप की कुल लागत का महज दसवां हिस्सा आपको देना होता है। पूर्वोत्तर राज्यों, सिक्किम, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी इलाकों में केंद्र की सब्सिडी 50% तक है। हिस्सा A में पूंजीगत सब्सिडी नहीं मिलती, वहां कमाई बिजली खरीद के अनुबंध (PPA) से होती है। राज्य के हिसाब से प्रतिशत थोड़ा बदल सकता है, इसलिए अपने राज्य की नोडल एजेंसी से पक्का कर लें। कंपोनेंट B में 7.5 HP तक का सोलर पंप मिलता है।
कौन कर सकता है आवेदन?
- आवेदक भारत का स्थायी नागरिक और पंजीकृत किसान हो
- खेती की जमीन उसके नाम पर हो, या वह उसे वैध तरीके से इस्तेमाल करता हो, जैसे लीज पर खेती
- हिस्सा B के लिए खेत में बिजली कनेक्शन न हो या इलाका ऑफ-ग्रिड हो
- हिस्सा C के लिए पहले से चालू हालत में ग्रिड वाला कृषि पंप हो
- हिस्सा A में किसान, समूह, सहकारी समिति, पंचायत या FPO आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते उपयुक्त जमीन हो
- आधार और बैंक खाता वैध हो और आपस में जुड़े हों
कौन-से कागज चाहिए?
- आधार कार्ड
- जमीन के कागजात
- बैंक पासबुक की कॉपी
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी
- राशन कार्ड या निवास प्रमाण पत्र
- संयुक्त जमीन हो तो बाकी हिस्सेदारों की सहमति (NOC)
- हिस्सा A के लिए जमीन का नक्शा और स्वामित्व या लीज के कागज
ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
- अपने राज्य की नोडल एजेंसी की वेबसाइट खोलें। योजना की जानकारी pmkusum.mnre.gov.in पर भी मिलती है।
- अपना राज्य चुनें और “आवेदन करें” पर क्लिक करें।
- नया रजिस्ट्रेशन करें। मोबाइल पर आया OTP डालकर नंबर की पुष्टि करें।
- अपनी जरूरत के हिसाब से हिस्सा B या C चुनें और फॉर्म भरें। नाम, पता और जमीन का ब्योरा दोबारा जांच लें।
- जरूरी कागज साफ स्कैन करके, पोर्टल के बताए फॉर्मेट में अपलोड करें।
- अगर आपके राज्य में कोई शुल्क या अंशदान लगता है, तो ऑनलाइन जमा कर दें। देर करने पर आवेदन अटक सकता है।
- पूरा फॉर्म एक बार देखकर सबमिट करें। जो आवेदन संख्या मिले, उसका स्क्रीनशॉट रख लें। स्टेटस देखने में वही काम आएगी।
ऑफलाइन भी हो सकता है
ऑनलाइन में दिक्कत हो तो नजदीकी कृषि विभाग, डिस्कॉम कार्यालय या राज्य की नोडल एजेंसी के दफ्तर चले जाइए। फॉर्म लेकर साफ अक्षरों में भरिए, कागजों की फोटोकॉपी लगाइए और जमा करते समय रसीद जरूर लीजिए। इसके बाद अधिकारी कागज जांचते हैं और खेत पर आकर निरीक्षण भी करते हैं। सब ठीक निकला तो चयन की सूचना मिल जाती है।
आवेदन का स्टेटस कैसे देखें?
जिस राज्य पोर्टल से आवेदन किया था, उसी पर जाइए। “आवेदन की स्थिति” वाले विकल्प पर क्लिक करके आवेदन संख्या और मोबाइल नंबर भरिए, कैप्चा डालिए और सबमिट कीजिए। स्टेटस सामने आ जाएगा। ऑफलाइन आवेदन किया हो, तो रसीद लेकर उसी दफ्तर में पूछ लीजिए।
हेल्पलाइन
राष्ट्रीय पोर्टल पर टोल-फ्री नंबर 1800-180-3333 दिया गया है। कोई उलझन हो तो वहां फोन कर सकते हैं।
डीजल पर हर साल होने वाला खर्च और बिजली के बिल का झंझट, दोनों से राहत पाने का यह अच्छा मौका है। अगर आप पात्र हैं, तो कागज तैयार रखिए और जल्द आवेदन कीजिए। अपने गांव के दूसरे किसान भाइयों को भी बताइए, ताकि सब मिलकर इसका फायदा उठा सकें।












