New Labour Code – अप्रैल 2026 की पहली तारीख से भारत के नए वित्त वर्ष के साथ-साथ कामकाजी दुनिया में भी एक बड़ा बदलाव आया है। नए श्रम कानून अब पूरी तरह अमल में आ चुके हैं और इससे नौकरीपेशा लोगों के मन में तरह-तरह की चिंताएं उठ रही हैं। क्या तनख्वाह घट जाएगी? भविष्य निधि पर क्या असर होगा? बुढ़ापे की पेंशन बेहतर होगी या नहीं?
इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के लिए हमने श्रम और रोजगार के विशेषज्ञ डॉ. राहुल सिंह से बातचीत की, जो टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से उच्च शिक्षा प्राप्त हैं और फिलहाल ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में अध्यापन कार्य कर रहे हैं।
💰 बेसिक सैलरी की नई शर्त — सबसे बड़ा बदलाव
नए श्रम कानून की सबसे अहम बात यह है कि अब किसी भी कर्मचारी की मूल वेतन (Basic Pay) कुल सैलरी का कम से कम आधी होनी चाहिए। इससे पहले कंपनियाँ बेसिक सैलरी को जानबूझकर कम रखती थीं और बाकी रकम अलग-अलग भत्तों के रूप में देती थीं — जिससे PF कटौती कम होती थी।
अब यह रास्ता बंद हो जाएगा। बेसिक बढ़ने से भविष्य निधि की गणना का आधार खुद-ब-खुद बड़ा हो जाएगा।
📉 हाथ में आने वाली सैलरी पर असर
डॉ. सिंह स्पष्ट करते हैं कि शुरुआत में कर्मचारियों को इन-हैंड सैलरी में कमी महसूस होगी। इसकी वजह है कि PF में कटने वाली रकम बढ़ जाएगी — कर्मचारी का अपना हिस्सा भी और नियोक्ता का योगदान भी।
लेकिन यहाँ एक जरूरी बात समझनी होगी — यह पैसा खर्च नहीं हो रहा, बल्कि आपके अपने खाते में जमा हो रहा है। यह रकम भविष्य में एक मजबूत माली सुरक्षा बनेगी।
🏦 EPFO और रिटायरमेंट फंड पर प्रभाव
EPFO में ज्यादा रकम जाने से रिटायरमेंट के समय मिलने वाला कुल फंड काफी बड़ा होगा। इसके साथ ही कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में भी योगदान बढ़ेगा, जिससे सेवानिवृत्ति के बाद हर महीने मिलने वाली पेंशन की राशि में भी सुधार संभव है — हालांकि यह EPS की मौजूदा सीमाओं और नियमों पर निर्भर करेगा।
नियोक्ताओं पर क्या पड़ेगा बोझ?
कंपनियों के नजरिए से देखें तो उनकी संचालन लागत में वृद्धि होगी, क्योंकि उन्हें भी PF में पहले से ज्यादा योगदान देना होगा। लेकिन इसका एक सकारात्मक पहलू भी है — जब कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा का भरोसा होता है, तो वे संस्था से ज्यादा जुड़े रहते हैं और नौकरी छोड़ने की प्रवृत्ति भी कम होती है।
किन लोगों पर लागू होंगे ये नियम?
ये बदलाव मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र यानी फॉर्मल सेक्टर के कर्मचारियों को प्रभावित करेंगे। सरकारी और निजी क्षेत्र में नियमों के लागू होने में कुछ भिन्नता हो सकती है।
आज का त्याग, कल की समृद्धि
नए श्रम कानून का असर तात्कालिक रूप से आपकी मासिक आमदनी पर दिखेगा, यह सच है। लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह बदलाव कर्मचारियों के हित में है। अधिक PF कटौती का सीधा अर्थ है — रिटायरमेंट के वक्त एक बड़ा और सुरक्षित वित्तीय कोश।








